नमस्कार दोस्तों हेल्थी दुनिया में आपका स्वागत है। आप सब कैसे हैं, आशा करता हूं आप सभी अच्छे होंगे परंतु केवल आशा ही कर सकता हूं क्योंकि मैं जानता हूं आजकल कि तनाव से भरी जिंदगी में अपनी सेहत का ध्यान रखना कितना मुश्किल है, लेकिन यह इतना मुश्किल भी नहीं है, हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में एवं खानपान में थोड़ा-सा बदलाव लाकर अच्छा सेहत पाकर सुखमय जीवन जी सकते हैं। आज मैं आप सभी दोस्तों को स्वस्थ रहने के लिए 17 Natural Health Tips in Hindi के द्वारा बताने जा रहा हूँ जिससे आपका सेहत अच्छा एवं जीवन को सुखमय बनने में सहायक होगा।

Natural Health Tips in Hindi अपने शरीर को हमेशा रोगमुक्त रखें
तो चलिए अब मैं आपको उन 17-Natural Health Tips के बारे में बताता हुँ जिसे अपना करके आप स्वास्थ रह सकते हैं।
- दिनभर में बार-बार खाना बंद करें।
- ज्यादा मात्रा में पानी पियें भोजन के तुरंत बाद में कभी पानी ना पियें।
- अधिक से अधिक फाइबर युक्त भोजन करें।
- वसा(fat) युक्त भोजन का सेवन कम करें।
- जंक फूड के सेवन से बचें।
- किसी भी प्रकार का नशा करने से बचें।
- तनाव मुक्त रहने के लिए रात में अच्छी एवं पूरी नींद लें।
- रोज सुबह योग प्राणायाम जरूर करें।
- तनाव(stress) से दूर रहें।
- फलों का जूस पीने से अच्छा फलों को दांतो से चबाकर खाएं।
- अधिक से अधिक हरी पत्तेदार शाक-सब्जियों का सेवन करें।
- चाय पीना कम करें।
- ज्यादा तीखे मिर्च-मसालों का सेवन कम करें।
- पर्याप्त मात्रा में प्रोटीनयुक्त भोजन का सेवन करें।
- Belly fat को कम करें अर्थात पेट की चर्बी से छुटकारा पाएं मोटापा से बचें।
- हर 15 दिन के अंतराल पर उपवास(fasting) अवश्य रखें।
- सुबह नाश्ता(breakfast) में अंकुरित अनाज एवं फलियों का सेवन अवश्य करें।
(1) दिनभर में बार-बार खाना बंद करें-
आहार अर्थात भोजन करने का एक समय निश्चित होना चाहिए कुछ व्यक्ति चाहे जब समय हो भोजन करने बैठ जाते हैं वे स्वयं अपने शरीर में रोगों को बुलावा देते हैं।

हमें ब्रेकफास्ट, लंच एवं डिनर के बीच में 3 घंटे का अंतर रखना चाहिए। इस समय के बीच में किया गया भोजन हमारे पूरे डाइजेस्टिव सिस्टम अर्थात पाचन-तंत्र को कमजोर करता है। यदि इन तीन घंटों के अंतराल में हम कुछ खा लें तो पहले किए गए भोजन का कच्चा रस नए आहार के साथ मिलकर दोष उत्पन्न कर देता है।
इसी के कारण हमारे शरीर में खट्टी डकार, बदहजमी होना,constipation (कब्ज), पेट में अम्ल की शिकायत होती है और फिर यही हमारे शरीर में बड़ी बड़ी बीमारियों का कारण बनता है।
(2) ज्यादा मात्रा में पानी पियें भोजन के तुरंत बाद में कभी पानी नहीं पियें-
हमारे पूरे शरीर को सुचारू-रूप से चलाने के लिए पानी की आवश्यकता सबसे अधिक होती है। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार मनुष्य बिना भोजन किए 1 सप्ताह से भी ज्यादा दिनों तक रह सकता है परंतु बिना पानी पिए 3 दिन से ज्यादा नहीं रह सकता। चिकित्सकों के अनुसार हमें प्रतिदिन 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए।

सही मात्रा में पानी पीने से पूरे शरीर का metabolism अर्थात चयापचय क्रिया ठीक रहती है इससे हमारे शरीर के सारे अंग सुचारु रूप से चलते हैं हमारा स्किन ग्लो करता है तथा हमारे शरीर के सारे टॉक्सिन अर्थात आविष तत्व पानी के साथ भूलकर बाहर निकल जाता है। वही इसके विपरीत यदि हम भोजन करने के तुरंत बाद पानी पीते हैं तो आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार हमारी जठराग्नि अर्थात पाचन शक्ति कमजोर होती है।
आयुर्वेद के अनुसार भोजन के दौरान पानी पीने से पानी अमृत के समान कार्य करता है और भोजन के बाद ठीक इसके विपरीत कार्य करता है। भोजन करने के ठीक 1 घंटे बाद पानी पीना चाहिए जिससे हमारा शरीर पुष्ट होता है एवं आरोग्य लाभ होता है।
(3) अधिक से अधिक फाइबर युक्त भोजन करें-

आजकल लोगों के फूड मेनू से फाइबर लगभग गायब हो रहे हैं जो बड़ा ही डरावना है। परंतु हम यह नहीं जानते की हमारे शरीर को जितनी विटामिन प्रोटीन एवं मिनरल की आवश्यकता होती है ठीक उतनी ही आवश्यक आता फाइबर की भी होती है इसके बिना हम अपने शरीर को स्वस्थ एवं रोग मुक्त रखने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।
शरीर में इसकी कमी के कारण हमें पेट दर्द, पेट में गैस बनना, ब्लड शुगर का बढ़ना, वजन बढ़ना तथा पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। इसकी कमी को पूरा करने के लिए हमें अपनी फूड में गेहूं का चोकरयुक्त आटा, बाजरे का आटा, राई का आटा, राजमा, दाल, सुखा अंजीर, अनार, गाजर, चुकंदर तथा बादाम को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए एवं साथ में पानी भी खूब पीना चाहिए।
(4) वसायुक्त भोजन का सेवन कम करें-

हमारे रोजमर्रा के खाने में वसा अर्थात fat का होना भी आवश्यक है। हमारे शरीर का एक मुख्य ऊर्जा स्रोत है।
यह हमारे शरीर में तापमान को नियंत्रित करता है तथा शरीर में यह हार्मोन के उत्सर्जन में सहायक होता है।
हमारा शरीर वसा के द्वारा कोशिकाओं (cells) के विकास में तथा कुछ मुख्य विटामिनों को अवशोषित करने में भी सहायता प्राप्त करता है। परंतु अधिक वसायुक्त भोजन का सेवन हमारे शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकता है यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है-
(1) संतृप्त वसा(saturated fat)
(2) असंतृप्त वसा(unsaturated fat)
(a) एकल असंतृप्त वसा(monounsaturated fat)
(b) बहु-असंतृप्त वसा(polyunsaturated fat)
इसे हम नीचे दिए हुए चार्ट द्वारा समझते हैं-

संतृप्त वसा(saturated fat)-
संतृप्त वसा हमारे शरीर के लिए काफी हानिकारक होता है इसकी अधिकता से हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह LDL cholesterol का स्तर बढ़ जाता है। इसके बढ़ने से शरीर के रक्त धमनियों में अवरोध उत्पन्न होता है जिससे ह्रदय रोग हो जाता है इसे कम मात्रा में ही लेना चाहिए।
यह मक्खन, शुद्ध घी, वनस्पति घी, नारियल तेल एवं ताड के तेल में पाया जाता है।
असंतृप्त वसा (unsaturated fat)-
असंतृप्त वसा हमारी शरीर के लिए फायदेमंद होता है यह HDL cholesterol के स्तर को बढ़ाती है। यदि एकल असंतृप्त वसा (mono unsaturated fat) एवं बहु-असंतृप्त वसा (poly unsaturated fat) की मात्रा भोजन में समान हो तो यह शरीर के लिए लाभदायक होता है।
हमारे शरीर में LDL cholesterol का स्तर घटाने के लिए हमें एकल असंतृप्त वसा (mono unsaturated fat) को बढ़ाना चाहिए। यह मुख्यता: मूंगफली, सरसों के तेल तथा जैतून के तेल में होता है।
बहु असंतृप्त वसा (poly unsaturated fat) मुख्यतः सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल एवं मकई में होता है।
(5) जंक फूड के सेवन से बचें –
चिप्स, कैंडी, बर्गर, पिज्जा, पेटीज जैसे तले-भुने फास्ट फूड को हम जंग फूड के नाम से जानते हैं। यह हमारी थोड़ी सी भूख को मिटाने वाली होती है जिसे हम अल्पाहार कहते हैं। परंतु यह हमारे पारंपरिक भोजन अथवा अल्पाहार से काफी भिन्न होता है। हमारे पारंपरिक भोजन में जहां पोषक तत्व भरपूर होता है वही जंक फूड में पोषक तत्व की काफी कमी होती है।
जंक फूड में अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, वसा (fat) और शुगर की मात्रा होती है। यह उच्च कैलोरी से युक्त होता है। इसको खाने से केवल बच्चे ही नहीं युवा वर्ग भी मोटापे का शिकार हो रहे हैं। साल दर साल मोटापे से ग्रस्त रोगियों की संख्या काफी बढ़ी है।
इसके सेवन से केवल मोटापा ही नहीं बल्कि यह हाई कोलेस्ट्रॉल तथा हाई ब्लड शुगर को भी बढ़ाता है, जंक फूड के सेवन से हृदय रोग एवं मधुमेह का खतरा बढ़ गया है। जंक फूड से केवल बच्चों तथा युवा वर्ग ही नहीं अपितु यह हर वर्ग के लिए नुकसानदेह होता है।

इंग्लैंड में शोधकर्ताओं की एक टीम ने गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली मादा चूहों पर शोध के दौरान उन्हें जंक फूड खाने को दिए इसके बाद उनका अध्ययन किया तो पता चला कि पैदा होने वाले बच्चों में कोलेस्ट्रॉल एवं वसा का स्तर अन्य सामान्य चूहों से ज्यादा है। यही नहीं चूहों के इन बच्चों के रक्त में ग्लूकोज तथा इंसुलिन का स्तर भी बढ़ा हुआ मिला जो टाइप- 2 मधुमेह का खतरा उत्पन्न करता है।
जंक फूड के सेवन से महिलाओं में मोटापे के साथ उनके शरीर में हार्मोन की कमी हो जाती है जिससे उनकी प्रजनन शक्ति कम हो रही है। अतः हमें जंक फूड के सेवन से जहां तक हो सके बचना चाहिए।
(6) किसी भी प्रकार का नशा करने से बचें –
हम शराब पीना, बीड़ी या सिगरेट पीना, चरस, गांजा, भांग तथा अफीम का सेवन आदि को ही नशा करना जानते हैं। परंतु नशे और भी कई प्रकार के होते हैं लेकिन नशा चाहे कितने भी प्रकार का क्यों ना हो यह हमेशा हमारा नाश ही करता है। इससे हमारा नैतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं शारीरिक पतन होता है। चलिए आज हम Natural Health Tips in Hindi इस लेख के द्वारा नशा करने से होने वाले नुकसान के बारे में थोड़ा विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।

नैतिक पतन-
नैतिकता हमारे मानव समाज का कभी ना अलग होने वाला अंग है क्योंकि हम इसके बिना पशुओं के जैसे होंगे। नैतिकता के अभाव में सही हम सही और गलत की पहचान नहीं कर सकते। सद्गुण एवं अवगुण बुराई तथा अच्छाई और न्याय एवं अन्याय का फर्क हम नशे की हालत में नहीं कर सकते हैं इसे ही हम नैतिक पतन कहते हैं।
आर्थिक पतन-
आज के दुनिया में मुफ्त में कुछ मिलता नहीं है और नशा करने की वस्तुएं जैसे शराब चरस गांजा अफीम आदि सारी वस्तुएं काफी महंगी मिलती है नशा करने वाले इन को किसी भी प्रकार से प्राप्त करते हैं। इससे इनकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो जाती है। नशा के चक्कर में कई तरह की भयंकर तथा लाइलाज बीमारी इन्हें हो जाती है जिससे इनकी सारी जमा पूँजी खत्म हो जाती है जिसे हम आर्थिक पतन कहते हैं।
सामाजिक पतन-
नशा करने से सबसे पहले व्यक्ति का नैतिक रूप से पतन हो जाता है। जिसके कारण वह समाज में रहने वाले अन्य लोगों के प्रति सही आचरण या व्यवहार नहीं कर पाता है। वह अच्छे-बुरे तथा न्याय-अन्याय का भेद नहीं कर सकता है जिसके फलस्वरूप मानव समाज से वह लगभग पूरी तरह कट जाता है इसे ही हम सामाजिक पतन कहते हैं।
शारीरिक पतन-
अंतिम परंतु सबसे महत्वपूर्ण शारीरिक पतन होता है जिसे हम इस प्रकार जान सकते हैं। नशा करने से हमें क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों का कैंसर, टीबी, एंफिसेमा बार बार खांसी, खांसने के समय मुंह से खून आना, वजन लगातार घटते जाना, छाती में दर्द रहना और हृदय रोग (heart disease) होना, शरीर में खून के थक्के जमना, दिमाग में दौरे पड़ना, पाचन तंत्र खराब होना, लिवर की खराबी इत्यादि कई प्रकार की भयंकर एवं जानलेवा बीमारियां होती है, और चिकित्सा समय पर ना होने के कारण अंत में असमय मृत्यु तक हो जाती है। जिसे हम शारीरिक पतन कहते हैं।
(7) तनावमुक्त रहने के लिए रात में पूरी नींद लें-

हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जिस तरह हमें व्यायाम करना अच्छा खाना स्वच्छ रहना नशा नहीं करना यह सभी आवश्यक है ठीक वैसे ही हमारे शरीर को पूरी दिनचर्या में रात के समय अच्छी एवं पूरी नींद लेना भी हमारे लिए अतिआवश्यक है। इससे हमारे शरीर को पर्याप्त आराम मिलता है जिससे अगले दिन के सभी कार्यों के लिए हमारा शरीर पूरी तरह तैयार होता है।
आजकल की तनाव से भरी जिंदगी में रात में अपर्याप्त नींद से हमें कई तरह की मानसिक बीमारियां हो जाती है। तनावमुक्त रहने के लिए पर्याप्त नींद आवश्यक है चिकित्सकों के अनुसार हमें रात्रि में रोज कम से कम 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है। रात में अगर हमारी नींद पूरी नहीं होती है तो दूसरे दिन हमारा शरीर थका हुआ महसूस करता है इससे हमारी मनोदशा (mood),मानसिक जागरूकता (mental awareness) एवं पूरे शरीर के स्वस्थ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जिसके कारण तनाव में वृद्धि होती है जिसे हम अवसाद (depression) कहते हैं और इसके कारण अंत में हमारा मानसिक संतुलन खत्म हो जाता है अतः हमें स्वस्थ एवं तनावमुक्त रहने के लिए रात में अच्छी एवं पूरी नींद लेना आवश्यक है।
(8) रोज सुबह योग प्राणायाम जरूर करें-

दोस्तों आजकल की तनाव से भरी जिंदगी में यदि हमें छोटी से लेकर बड़ी कई प्रकार के असाध्य बीमारियों से बचना है तो Natural Health Tips In Hindi इस लेख के द्वारा बताये गए सभी टिप्सों का पालन करते हुये हमें रोज सुबह योग प्राणायाम अवश्य करना चाहिए। इसके कई लाभ हैं जो हमें बच्चों से लेकर बड़ों तक के सभी वर्गों में देखा जाता है।
प्राणायाम करने से हम तनाव से दूर रहते हैं पूरा शरीर स्वस्थ रहता है, मन एकाग्र रहता है, इससे बच्चों तथा बड़ो दोनों को विशेष लाभ होता है। मन एकाग्र रहने से बच्चों को अपने शिक्षा में एवं बड़ों को अपने कार्यों को करने में आसानी होती हैं।
योग प्राणायाम के द्वारा हमारे शरीर में स्थित कई प्रकार की बीमारियां दूर हो जाती है जिनमें प्रमुख है पेट से संबंधित बीमारीयॉं, ह्रदय रोग, त्वचा रोग, लीवर से संबंधित बीमारी आदि। योगासन एवं प्राणायाम करने से हमारी त्वचा में चमक आती है, इसके अलावे अनेक प्रकार की बीमारियां स्वतः ठीक हो जाती है। इसलिए हमें रोज सुबह योग प्राणायाम जरूर करना चाहिए।
(9) तनाव(stress) से दूर रहें-
आजकल हर दूसरा व्यक्ति तनाव ग्रस्त मिलता है कोई ना कोई प्रकार का तनाव उसके दिमाग में होता है धीरे धीरे यह एक बड़ी समस्या अथवा यूं कहिए कि एक गंभीर बीमारी का रूप लेता जा रहा है। आखिर यह तनाव होता क्या है? आइए जानते हैं-
तनाव हमारे मन का एक अंतर्द्वंद है। सामान्य शब्दों में यदि किसी व्यक्ति की मन की इच्छा पूरी ना होकर अधूरी रह जाए या उसके विपरीत कार्य हो तो उसके मन एवं दिमाग में जो द्वन्द्व चलता है उसे ही तनाव कहते हैं। तनाव हमारे मन से उपजा विकार या वह अंतर्द्वंद है जो हमारे मन अब हम मनोभाव पर गहरा आघात करता है।

तनाव से हमें कई प्रकार की बीमारी हो जाती है। महिलाओं में हार्मोन का असंतुलन, अनियमित मासिक धर्म, का होना अंडाशय की कार्यप्रणाली बाधित होना, जो उनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। वही पुरुषों में लिंग में तनाव की कमी (erectile disfanction), शुक्राणुओं (sperm) की संख्या में कमी आना, जैसी समस्याएं होती है।
इसके कारण नपुंसकता में वृद्धि होती है। साथ ही इससे अनिद्रा, मोटापा, डायबिटीज,(शुगर की बीमारी) कब्ज की शिकायत एवं पाचन तंत्र की कमजोरी भी हो जाती है तथा इसके कारण हमें सिर दर्द हो जाता है जो आगे चलकर माइग्रेन में बदल जाता है,तनाव से हमें या तो भूख कम लगता है या ज्यादा, इसके कारण हमें अनिद्रा की शिकायत हो जाती है।
यह हमारे शरीर में रक्तचाप (Blood Pressure) को बढ़ाता है किसके बढ़ने से हमें हृदय रोग तथा ब्रेन हेमरेज तक का खतरा बढ़ जाता है। परंतु इसके बचने के भी कई उपाय हैं जैसे-
- योगासन प्राणायाम रोज करें।
- रात में पर्याप्त नींद लें।
- अहंकार, लोभ अथवा किसी वस्तु की लालसा को त्याग दें।
- केवल अपने में न रहकर दोस्तों एवं परिवार वालों के साथ कुछ समय व्यतीत करें।
- नकारात्मक लोगों से जहां तक हो सके दूर रहें।
- प्रत्येक दिन ध्यान मेडिटेशन करें।
- सकारात्मक विचारों वाली एवं प्रेरणादायक मोटिवेशनल पुस्तकों का अध्ययन करें।
- अपने आपको सदा व्यस्त रखें। एक ही कार्य में ना लग रहे हैं यदि वह कार्य पूरा नहीं हो रहा हो तो तुरंत दूसरा कार्य करें कभी खाली ना बैठे हैं कहा गया है “खाली दिमाग शैतान का घर होता है” खाली बैठने से दिमाग में नकारात्मक सोच आता है जो ठीक नहीं है, अतः अपने को व्यस्त रखें।
इन सभी बातों को अपनाकर हम तनाव से बच सकते हैं।
(10) फलों का जूस पीने से अच्छा फलों को दांतो से चबाकर खाएं-
अपने आप को आधुनिक(modern) कहलाने वाले कुछ लोगों का कहना है की फलों का जूस पीने से हमारा शरीर फलों से प्राप्त विटामिन, मिनरल्स आदि पोषक तत्वों को आसानी से अवशोषित करता है। उनके अनुसार जूस पीने से हमें कैंसर का खतरा कम होता है तथा हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
जूस पीने से हमारा शरीर उन टॉक्सिंस को निकालने में सहायता प्राप्त करता है जो हमारे शरीर में जमा होते रहते हैं,उनके अनुसार इससे हमारे पाचन तंत्र को शक्ति मिलती है तथा यह हमारे बड़े हुए वजन को कम करने में हमारी मदद कर सकता है। परंतु उपरोक्त इन सभी बातों का हमें कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।
मशीनों द्वारा निकाले गए जूस के मुकाबले हमारे दांतो द्वारा चबा कर खाए गए फल के जूस में ज्यादा पोषक तत्व (phytonutrients) एवं फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। जो हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करता है, फाइबर से हमारा पाचन तंत्र मजबूत होता है तथा कब्ज दूर होता है एवं वजन भी सामान्य रहता है।
फलों को दांतो द्वारा चबाकर खाने से दांतों की एक तरह से कसरत होती है जिससे मुंह में लार ज्यादा बनता है जिसके चलते खाया हुआ फल आसानी से पच जाता है अतः फलों का जूस पीने से अच्छा है कि हम फलों को चबाकर खाएं।

(11) अधिक से अधिक पत्तेदार साग-सब्जियों का सेवन करें-

हमारे दैनिक भोजन की थाली से पत्तेदार साग-सब्जियां लगभग गायब हो रही हैं। इसके स्थान पर लोग फास्ट-फूड का सेवन करना ज्यादा पसंद करते हैं परंतु यह बिल्कुल गलत है, हमारा शरीर निरोग तथा शक्तिशाली रहने के लिए बहुत हद तक हरे पत्तेदार साग तथा सब्जियों पर निर्भर रहता है, क्योंकि साग-सब्जियों में बहुत ही जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।
हमारे देश में कई तरह की पत्तेदार साग का सेवन किया जाता है इनमें से प्रमुख है मेथी, पालक, बथुआ का साग, सहजन का साग, सरसों का साग आदि। इन पत्तेदार साग में आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से हम Anemia (खून की कमी) जैसी बीमारी से बचे रहते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन सी, कैल्शियम एवं बीटा कैरोटीन पाया जाता है।अब हम इस लेख Natural Health Tips in Hindi के द्वारा इन पत्तेदार साग में पाए जाने वाले गुणों के बारे में विस्तार से जानेंगे –
मेथी का साग–

मेथी के साग को हमारे देश में काफी चाव से खाया जाता है। इसके बीजों में भी पोषक तत्व इसके पत्तों से ज्यादा होता है इसके सेवन से मधुमेह ठीक होता है। रात भर के लिए पानी में भिगोए हुए मेथी के दानों को सुबह दही के साथ पीसकर अपने बालों में लगाएं तथा 1 घंटे बाद बालों को पानी से धो लें इससे बालों का असमय सफेद होना मैं काफी लाभ होता है।
पेट में गैस की शिकायत होने पर भी इसका उपयोग किया जाता है। निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure) की बिमारी में मेथी के साग में स्वाद के अनुसार लहसुन एवं अदरक मिलाकर सेवन करने से निम्न रक्तचाप सामान्य हो जाता है।
पालक का साग–

इसमें काफी मात्रा में (iron) लौहतत्व, प्रोटीन, कैल्शियम, कैरोटीन, विटामिन सी एवं थोड़ी मात्रा में थायमीन तथा राइबोफ्लेविन पाया जाता है। हमारे शरीर में खून की कमी एनीमिया को दूर करने में यह सहायक होता है।
गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं में होने वाली एनीमिया में पेश का सेवन कराया जाता है। इसकी प्रकृति ठंडी होती है। यह त्रिदोष (वात, पित्त एवं कफ) का नाशक होता है। पालक का नियमित रूप से सेवन करने से हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा में वृद्धि होती है, हमारा खून साफ होता है एवं हड्डियां मजबूत होती है।
पालक का जूस प्रतिदिन पीने से दुर्बल व्यक्तियों को लाभ होता है इससे दुर्बलता का नाश होकर शरीर में भरपूर ऊर्जा प्राप्त होती है। पालक के जूस के साथ गाजर का रस मिलाकर पीने से दांतो के अनेक प्रकार की समस्याएं जैसे मसूड़ों से खून आना दातों का खोखलापन दूर होकर यह दांतो को मजबूती प्रदान करता है।
पालक कब्ज के लिए रामबाण औषधि है, इसका सेवन नियमित रूप से करने पर यह आंतों में जमे हुए मल का निष्कासन करके आंतों की सफाई करता है। गले के बीमारियों एवं श्वास रोग में पालक का सेवन करने से यह दमा रोग तपेदिक तथा गले में होने वाले विकार को ठीक करता है।
बथुआ का साग–

बथुआ के साग को आप सभी ने जरूर खाया होगा यह काफी जाना पहचाना पत्तेदार साग है। इसमें काफी मात्रा में (लौहतत्व)आयरन एवं विटामिन ए पाया जाता है। इसने कई औषधीय गुण पाए जाते हैं इसका सेवन मुख्यतः सर्दियों के मौसम में किया जाता है।
बथुआ का साग खाने से हमारी पाचन शक्ति को बढ़ाने में यह हमारी मदद करता है हमारे शरीर में त्रिदोष वात पित्त एवं कफ को शांत करता है, हमारे शरीर में यह भोजन की रुचि को बढ़ाता है।
इसमें विटामिन ए की अधिकता के कारण यह हमारे आंखों के लिए काफी फायदेमंद है। इससे पेट के कीड़ों का नाश होता है तथा यह कब्ज का नाश करता है एवं गले के लिए अत्यंत लाभकारी है और भी इसमें कई गुण मौजूद हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।
सहजन का साग–

सहजन का साग अपने स्वास्थ्यवर्धक गुणों के लिए जाना जाता है। यह लगभग हर एक मौसम में पाया जाने वाला साग है इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन C प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें केरोटिन, थायमिन, आयरन एवं राइबोफ्लेविन की भी अच्छी मात्रा होती है।
सहजन के पत्तों को साग के रूप में तथा इसकी फलियों को सब्जियों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।इसके पेड़ का हर एक भाग जैसे पत्ते, फलियां, छाल, जड़ एवं इससे निकलने वाला एक प्रकार का राल इसे हम गोंद भी कहते हैं यह कई बीमारियों के औषधि के रूप में काम आता है।
इसके प्रयोग से सिर दर्द, आंखों की कई बीमारियों में, दांतों का सड़ना, हिस्टीरिया, मन्दाग्नि (भूख कम लगना), पाचन-शक्ति की कमी, कान में दर्द, गला बैठना, पेट दर्द, अफारा, किडनी में पथरी, आंतों की क्रीमी, गठिया, आमवात, दाद एवं लिवर में कैंसर आदि इससे कई प्रकार की बीमारियां ठीक होती हैं।
सरसों का साग–

सरसों के साग को कौन नहीं जानता यह खाने में बड़ा स्वादिष्ट लगता है। इसे पूरे भारतवर्ष में खासकर उत्तर भारत में बड़े चाव से खाया जाता है। सरसों के पत्तों को साग के रूप में तो इसके बीजों को पीसकर तेल निकाला जाता है, जिसे हम सरसों का तेल के नाम से जानते हैं।
भारतीय रसोई में इसके बिना कोई भी काम नहीं हो सकता, सरसों का पत्ता जिसे हम साग के रूप में खाते हैं स्वाद में चरपरा होता है। इसके गुणों की बात करें तो इसकी प्रकृति गर्म होती है यह बल को बढ़ाने वाला स्वादिष्ट, वात एवं कफ का नाश करने वाला, पित्तनाशक, पेट की क्रीमीयों का नाश करने वाला एवं कंठ जनित रोगों को ठीक करता है, इसके बीज में तेल, मायरोसीन, सिनिग्रीन एवं सिनपीन नामक द्रव्य पाया जाता है।
पिसे हुए बीजों के अवशेष को खल्ली कहा जाता है जो हमारे मवेशियों को चारा के साथ मिलाकर खिलाया जाता है जो काफी पौष्टिक होता है। सरसों के बीजों तथा उसके तेल का कई प्रकार से औषधीय उपयोग होता है। जैसे- सिरदर्द, दांतदर्द, सर्दी-खांसी, कान में दर्द, आंखों की पलकों में होने वाली फुंसी में, साइटिका दर्द, गठिया एवं आमवात में मालिश करने में आदि इसका अनेक प्रकार की बीमारियों में उपयोग किया जाता है।
हरी पत्तेदार साग-सब्जियों में पाये जाने वाले गुण-
वहीं यदि हम हरी सब्जियों की बात करें तो हमारे देश में कई गुणकारी सब्जियां उगाई जाती है जिनमें गर्मियों के मौसम में परवल, भिंडी, करेला, तुरई, बैंगन, सहजन की फली, टिंडे, लौकी एवं सर्दियों में फूलगोभी, पत्तागोभी, सेम, गाजर आदि पाई जाती है। हमें अपने खाने में सब्जियों की मात्रा को बढ़ाना चाहिए, क्योंकि इससे अनायास ही हमें अपने शरीर के लिए पूर्ण- पोषण मिलता है।
सब्जियों में काफी मात्रा में प्रोटीन, विटामिन एवं मिनरल (खनिज तत्व) पाया जाता है। सब्जियों के प्रतिदिन सेवन से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। इससे हमारे पाचन शक्ति में वृद्धि होती है। सब्जियों के सेवन से हमारे शरीर को भरपूर मात्रा में फाइबर मिलता है जिससे हमें कब्ज नहीं होता है।
सब्जियों को खाने से हम कई प्रकार के घातक बीमारियों जैसे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप एवं कैंसर आदि कई बीमारियों से बचे रहते हैं। इसके सेवन से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immune system) में वृद्धि होती है। सब्जियों में बहुत कम मात्रा में कैलोरी पाई जाती है तथा इसमें वसा की मात्रा भी बहुत कम होती है। जिसके कारण हमें मोटापा नहीं होता है।
सब्जियों के सेवन से हमारी त्वचा चमकने लगती है,तथा यह हमारे बालों के लिए भी लाभदायक होता है। अतः हमें प्रत्येक दिन अधिक से अधिक पत्तेदार शाक-सब्जियों का सेवन करना अति आवश्यक है जिससे हमारा शरीर स्वस्थ रहें।
(12) चाय पीना कम करें-
कोई भी कर्म को अति करना हमेशा हमारे जीवन के लिए दुःखदायी होता है, ठीक यही बात चाय के लिए भी लागू होता है। आजकल बिना चाय पीए दिन की शुरुआत ही नहीं होती है, कई लोग आज कल सुबह नींद से जगने पर बिस्तर में पड़े हुए ही चाय पी लेते हैं जो एक बहुत ही बुरी आदत है।
हमें दिन की शुरुआत थोड़ा गर्म पानी पीकर करनी चाहिए, इससे हमारा पेट साफ होता है, हमें कब्ज नहीं होता है और शरीर की चर्बी कम होती है। चाय को यदि कम मात्रा में पिया जाए तो यह हमारे शरीर की थकान को दूर करती है, ठंड का नाश करके हमारे शरीर में पसीना लाती है परंतु ज्यादा मात्रा में चाय का सेवन करने से हमारे शरीर में इसके कई बुरे प्रभाव भी होते हैं।
चाय में कैफीन, थीन, टेनिन, ग्लूटिन एवं यूरिक एसिड जैसे हानिकारक तत्व पाए जाते हैं जो हमारे शरीर को धीरे-धीरे रोग ग्रस्त बनाते हैं। तो चलिए हमारे शरीर में इसके हानिकारक प्रभाव के बारे में विस्तार से जाने-
- Caffeine (कैफ़ीन)-
कैफीन का हमारे हृदय संस्थान पर बहुत बुरा असर होता है। चाय के अत्यधिक सेवन से हमें ह्रदय रोग हो जाता है चाय में कैफीन की मात्रा 5% होती है। - Thin (थीन)-
थीन चाय में पाया जाने वाला एक तत्व होता है। इसमें नाइट्रोजन की मात्रा अधिक पाई जाती है। चाय में थीन की मात्रा 3% से 6%होती है। यह हमारे शरीर में रक्त को दूषित करता है जिससे हमारे शरीर की रोग- प्रतिरोधक शक्ति कम होती है। - Tannin (टेनिन)-
टेनिन के कई दुष्परिणाम हमारे शरीर में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बीमारियों के रूप में दिखाई पड़ते हैं। इसकी अधिक मात्रा से हमें कब्ज की शिकायत हो जाती है। कब्ज कई अन्य प्रकार की बीमारियों का जड़ है, इससे शरीर में अनेक बीमारियां उत्पन्न होती है। टेनिन हमारे शरीर में स्वाभाविक निद्रा का नाश करके अनिद्रा रोग उत्पन्न करता है जिससे हमारे शरीर में अवसाद (depression) होता है एवं हमारा पाचन संस्थान कमजोर होता है। चाय में टेनिन की मात्रा 16% होता है। - Gluten (ग्लूटिन)-
चाय में ग्लूटिन उपस्थित रहता है जो हमारे शरीर के लिए अच्छा तत्व है। इसे बलवर्धक माना जाता है, यह हमारे रक्त को बढ़ाती है परंतु चाय को पानी में डालकर उबालने से यह तत्व नष्ट होकर इसकी शक्ति खत्म हो जाती है, इससे हमारे शरीर को कोई फायदा नहीं हो पाता है। - Uric Acid (यूरिक एसिड)-
चाय में यूरिक एसिड काफी मात्रा में उपस्थित रहता है। एक किलोग्राम चाय में यह लगभग 3.5gm की मात्रा में पाया जाता है। इसकी अधिक मात्रा से हमारे शरीर में कई रोग उत्पन्न होते हैं जैसे किडनी(वृक्क) कमजोर होना, मूत्राशय(यूरिनरी ब्लैडर) तथा युरेटस कमजोर हो जाता है, इसकी अधिकता से हड्डियों के गांठो में सूजन हो जाता है, जिससे दर्द होकर चलने फिरने में कष्ट होता है, जिसे हम गठिया रोग के नाम से जानते हैं। यूरिक एसिड की अधिकता से हमें बार-बार पेशाब जाने की शिकायत हो जाती है।

चाय का हमारे नाड़ी संस्थान (nervous system) पर बहुत ही गहरा असर होता है, इसके परिणाम स्वरूप व्यक्ति दिन में कई कई बार चाय पीता है, इसके बिना वह कोई कार्य नहीं कर पाता वह चाय पीने का आदी हो जाता है, अत्यधिक एवं बार-बार चाय के सेवन से हमारा नाड़ी संस्थान (nervous system) कमजोर हो जाता है।
चाय का अधिक सेवन करने से हमारे शरीर में स्थित अन्न नली (Esophagus), आमाशय (Stomach), तथा दोनों आंत small intestine और large intestine पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे हमारे शरीर की पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। इसके अलावा चाय के अति सेवन से हमारे लीवर की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाती है।
भोजन द्वारा प्राप्त विटामिन एवं खनिज तत्व को भी यह चाय नष्ट करके हमें कई भयंकर बीमारियां प्रदान करता है। जिनमें पुरुषों में होने वाले स्वप्नदोष एवं नपुंसकता भी शामिल है। अतः यदि हम अपने को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो हमें चाय से दूर रहना चाहिए।
(13) ज्यादा तीखे मिर्च-मसालों का सेवन कम करें-
कुछ लोगों को आपने कहते सुना होगा कि उन्हें ज्यादा तीखे मिर्च मसालेदार खाना पसंद आता है। यदि इसका सेवन थोड़ी मात्रा में एवं कभी-कभी किया जाए तो अक्सर इससे कोई हानि हमारे शरीर को नहीं होता है, परंतु यदि हम अपने दैनिक भोजन में ऐसे तीखे मिर्च- मसालों का सेवन ज्यादा मात्रा में एवं प्रतिदिन करते हैं तो हमारे शरीर को इससे काफी नुकसान पहुंचता है, चलिए हमारे शरीर को होने वाले नुकसान अर्थात बीमारियों के बारे में थोड़ा विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं-

यदि कम मात्रा में हरी मिर्च का सेवन करें तो हमें इससे नुकसान नहीं होता बल्कि फायदा ही होता है क्योंकि इसमें विटामिन A, B6, C, आयरन, पोटेशियम, कार्बोहाइड्रेट, एवं प्रोटीन काफी मात्रा में पाया जाता है इसके अलावा इसमें कैप्साइसिन (capsaicin), क्रीप्टोक्सैंथिन (cryptoxanthin) एवं बीटा-कैरोटिन (beta-carotene) आदि अच्छी चीजें भी पाई जाती हैं, परंतु अति किसी भी चीज का अच्छा नहीं होता है।
यह हम सभी जानते हैं की इन मिर्च-मसालों का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से हमारे पेट में जलन होने लगती है, इससे हमारे पेट के अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचता है, पेट में सूजन हो जाता है। जिसके कारण पेट में दर्द, उल्टी, सीने में जलन, एसिडिटी, किसी-किसी को मलद्वार में जलन के साथ दस्त अथवा कब्ज की शिकायत हो जाती है, यह हमारे आंत एवं लीवर को नुकसान पहुंचाता है। अतः हमें सोच-समझकर ही एवं कम मात्रा में तीखे मिर्च-मसालों का सेवन करना चाहिए।
(14) पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करें-
मनुष्य के दैनिक भोजन में जो 6 महत्वपूर्ण अवयव पाए जाते हैं उनमें प्रोटीन का स्थान सबसे ऊपर है। इसके बिना हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। आज हम इस लेख Natural Health Tips in Hindi के माध्यम से आपको प्रोटीन क्या है?, कितने प्रकार का होता है एवं इसकी कमी से हमारे शरीर में कौन-कौन से रोग होते हैं इसके बारे में जानकारी देंगे।
प्रोटीन बहुत ही जटिल नाइट्रोजन से युक्त एक कार्बनिक पदार्थ है जो कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन एवं हाइड्रोजन के अणुओं के संयोग से बना होता है। इसके अतिरिक्त इसमें कम मात्रा में फास्फोरस, कॉपर, जिंक एवं सल्फर भी पाया जाता है। प्रोटीन तीन प्रकार का होता है – सरल प्रोटीन, संयुक्त प्रोटीन एवं व्युत्पन्न प्रोटीन।
सरल प्रोटीन (Simple Protein)-
सरल प्रोटीन का निर्माण सिर्फ Amino acid द्वारा होता है।
संयुक्त प्रोटीन (Combined Protein)-
संयुक्त प्रोटीन का निर्माण Amino acid के साथ कुछ अन्य पदार्थों के अणुओं के मिलने से होता है।
व्युत्पन्न प्रोटीन (Derived Protein) –
व्युत्पन्न प्रोटीन का निर्माण सरल अथवा संयुक्त प्रोटीन के विघटन के फलस्वरूप होता है।

20 Amino acid के आपस में मिलकर जो घटक तैयार होता है उसे ही हम protein के नाम से जानते हैं। पौधे इन सभी 20 Amino acid को खुद-ब-खुद तैयार कर लेते हैं। हमारा शरीर कुछ Amino acid को छोड़कर बाकी सभी को बना सकता है।
हमारा शरीर जिन अमीनो एसिड को नहीं बना पाता है उसे हम आवश्यक अमीनो एसिड कहते हैं। जिनके नाम लाइसीन, फेनिलएलानीन, लिउसीन, आइसोलिउसीन, वेलीन, ट्रिप्टोफेन, मेथिओनिन, हिस्टिडाइन एवं थ्रेओनीन है।
इन एमिनो एसिड को मनुष्य का शरीर अपने अंदर नहीं बना पता है, उसकी पूर्ति हम बाहर से लिए गए खाद्य पदार्थों से करते हैं। जिनमें शाकाहारी लोगों के लिए सोयाबीन, मटर, मूंग दाल, मसूर दाल, उड़द दाल, राजमा, लोभिया, गेहूं का आटा एवं मक्का आदि होता है। मांसाहारी लोगों के लिए मांस, मछली, लीवर, अंडा एवं दूध के द्वारा प्रोटीन की पूर्ति करते हैं।
प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग- Protein Deficiency Diseases-
Protein हमारे शरीर के मांस पेशियों को दोबारा सही से बनने में मदद करता है प्रतिदिन हमारा शरीर मांसपेशियों में पुराने कोशिकाओं(cells) के जगह नई कोशिकाओं को स्थापित करता है जिससे हमारी मांसपेशियां स्वस्थ बनी रहती है। यह प्रोटीन के कारण ही संभव हो पाता है।
- इसकी कमी से हमारी मांसपेशियां रूखी एवं बेजान हो जाती है।
- प्रोटीन की कमी से हमारे बाल रूखे कांतिहीन एवं बेजान होकर झड़ने लगते हैं।
- प्रोटीन की कमी से हमारी त्वचा रूखी होकर सूखने लगती है हमारे नाखून अचानक टूट कर गिर जाते हैं।
- प्रोटीन की कमी से हमारा इम्यून सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है जिसके कारण हम बार-बार बीमार पड़ते रहते हैं।
- इसकी कमी से हमारे शरीर में सूजन हो जाती हैं जिससे हम मोटा दिखलाई देते हैं।
- शरीर में थकान एवं कमजोरी प्रोटीन की कमी से होती है यह हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
- प्रोटीन की कमी से हमारे मांसपेशियों तथा हड्डियों के जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है।
- छोटे बच्चों में इसकी कमी से कुपोषण की भयंकर बीमारी हो जाती है जिसे हम क्वाशियोरकर के नाम से जानते हैं अधिक दिनों तक कुपोषित रहने से बच्चे की मृत्यु तक हो जाती है।
प्रतिवर्ष विश्व में प्रोटीन की कमी द्वारा होने वाले कुपोषण से बचाव एवं वयस्कों की संख्या को मिलाकर 6 मिलियन लोगों की मृत्यु हो जाती है। अतः हमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए।
(15) Belly fat को कम करें अर्थात् पेट की चर्बी से छुटकारा पाएं मोटापा से बचें-
चर्बी (fat) हमारे शरीर के लिए रिजर्व ऊर्जा स्रोत का कार्य करता है। जब हम कभी उपवास (fasting) करते हैं या कम मात्रा में खाना खाते हैं तो हमारा शरीर इसी चर्बी का उपयोग करके शरीर को चलाने के लिए शक्ति प्रदान प्राप्त करता है। जब यह ऊर्जा का स्रोत खाली होने लगता है तब हमें थकान महसूस होने लगता है और हम फिर कुछ खाकर इसकी पूर्ति करते हैं।

यहां तक तो ठीक है परंतु जब हम निरंतर तेल, मिर्च-मसाला युक्त भोजन करते हैं तथा कोई शारीरिक मेहनत वाला कार्य नहीं करते हैं तो चर्बी(fat) जो हमारे शरीर के लिए रिजर्व ऊर्जा का भंडार होता है वह हमारे शरीर के कई हिस्सों में जमा होते रहता है और हमारा शरीर फूलकर लगभग दोगुना हो जाता है जिसे हम मोटापा कहते हैं। कुछ लोगों में यह बीमारी का रूप ले लेता है।
आज पूरे विश्व के कई देशों में यह एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। पूरे शरीर में कई जगह चर्बी के जमा होने से हमारा शरीर देखने में काफी भद्दा लगता है खासकर पुरुष एवं महिला दोनों के पेट में चर्बी जिसे हम belly fat कहते हैं वह सभी लोगों के नजर में आ जाता है केवल शारीरिक सुंदरता ही कम नहीं होता बल्कि यह कई तरह के भयंकर एवं जानलेवा बीमारियों का घर होता है।
यह belly fat जिसे हम Obesity भी कहते हैं। यहाँ की चर्बी (fat) काफी मुश्किलों से दूर होती है, इसके कारण हमें उच्च रक्तचाप (High blood pressure), शुगर (Diabetes), हृदय रोग (Heart disease) आदि कई तरह की भयंकर एवं जानलेवा बीमारियां हो जाती है।
मोटापा को कम करने के लिए हमें अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। फास्ट फूड ज्यादा तेल, मिर्च-मसालायुक्त खाद्य पदार्थ से पूरी तरह से परहेज करना चाहिए तथा नियमित रूप से रोज योग आसन एवं प्राणायाम जरूर करें मोटापा कम करने के लिए महत्वपूर्ण आसन-
खड़े होकर के करने वाले आसन-
- तिर्यक ताड़ासन
- त्रिकोणासन
- कोणासन
- पादहस्तासन
बैठकर के करने वाले आसन-
- स्थिर कोणासन
- पश्चिमोत्तानासन
पेट के बल लेटकर के करने वाले आसन-
- भुजंगासन
- शलभासन
पीठ के बल लेटकर करने वाले आसन-
- अर्द्धहलासन
- पादवृत्तासन
- द्विचक्रिकासन
- मर्कटासन
रोज सुबह प्रत्येक दिन इन आसनों को करने से निश्चय ही मोटापा से मुक्ति मिलती है, इसके अलावा सुबह-शाम नियमित रूप से टहलना चाहिए इससे शरीर में चर्बी (fat) की अत्यधिक मात्रा घटकर सामान्य हो जाती है,और हमें obesity तथा उसके कारण होने वाली अन्य बीमारियों से छुटकारा मिलता है, हमारा शरीर देखने में सुंदर एवं आकर्षक लगता है।
(16) हर 15 दिन के अंतराल पर उपवास(fasting) रखें-
हमारे भारतीय ऋषि-मुनि बड़े ही ज्ञानवान, धर्मनिष्ठ, भविष्यदृष्टा एवं वैज्ञानिक सोच रखने वाले थे। उन्होंने यह पहले ही जान लिया था कि हमारे देशवासी धर्म के प्रति आस्था रखने वाले तो होंगे परंतु उन्हें अपने शरीर को कैसे स्वस्थ रखा जाए इसके प्रति कोई ध्यान अथवा जानकारी नहीं रहेगा, इसीलिए उन्होंने उपवास (fasting) अर्थात भूखे रहकर शरीर को स्वस्थ रखने की चिकित्सा पद्धति को धर्म के साथ जोड़ दिया।
हमारे देश के लोग उसी बात को आंखें बंद करके विश्वास करते हैं जो धर्म से जुड़ा हो इसी कारण हमारे धर्मशास्त्रों में उपवास को सभी त्योहारों एवं पूजा-पाठ की पद्धति में शामिल करके उपवास की महिमा को बढ़ा चढ़ा कर कहा गया है, ताकि सामान्य जनमानस को इसके द्वारा आरोग्य लाभ हो सके।
हमारा आयुर्वेदशास्त्र एवं आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इस बात से सहमत है की महीने में हर 15 दिन के अंतराल पर यदि 1 दिन भी बिना खाए पिए भूखा रहा जाए तो यह हमारे शरीर के लिए अत्यंत हितकारी होता है। इससे हमारा पाचन-संस्थान जो अनवरत दिन-रात कार्य करता है उसे आराम मिलता है, इसका शरीर के अन्य अंग-प्रत्यंगो पर अच्छा असर पड़ता है।
उपवास करने से हमारे शरीर में स्थित पाचन तंत्र में शामिल सभी अंग क्रमशः अन्ननली (Esophagus), आमाशय (Stomach), पित्ताशय (Gall bladder), यकृत (Liver), छोटी आंत (Small intestine), तथा बड़ी आंत (Large intestine) को आराम मिलता है।
प्रत्येक दिन भोजन करने से हमारे शरीर में जो विजातीय द्रव्य (Toxins) जमा हो जाते हैं उसे निकालकर बाहर करने के लिए हमारे शरीर को समय मिलता है और हमारा शरीर अंदर से साफ एवं स्वच्छ हो जाता है।
शारीरिक एवं मानसिक आरोग्यता तथा आध्यात्मिक लाभ ही उपवास करने के मुख्य उद्देश्य हैं। उपवास (fasting) करने से हमारे रक्त में बढ़ी हुई शुगर की मात्रा को कम किया जा सकता है, इससे मधुमेह (Diabetes) नियंत्रित होता है।
हमारे शरीर के हड्डियों के जोड़ों में जो दर्द होता है वह यूरिक एसिड के वहां जमा हो जाने से होता है उपवास करने से हमारा शरीर यूरिक एसिड जैसे Toxins को पेशाब के द्वारा बाहर निकाल देता है, जिससे हमें जोड़ों के दर्द से राहत मिलता है।
इसके अलावा उपवास करने से कब्ज, मोटापा, अस्थमा, गठिया, बवासीर, अतिसार, बुखार, जी घबराना, भूख कम लगना, अफारा, पेचिश, आदि बीमारियों में रामबाण औषध जैसा कार्य करता है। इससे मानसिक दुर्बलता, चिंता, डिप्रेशन तथा यकृत (Liver) में होने वाले रोगों में भी लाभ होता है।
हमारे शरीर के लिए 1 दिन का उपवास ही पर्याप्त होता है इसके अलावा भी एक से ज्यादा दिनों तक उपवास करने की पद्धति है, उपवास करने पर यूं तो कुछ भी खाना नहीं चाहिए परंतु एक से ज्यादा दिनों तक उपवास करने पर हम सेव, केला, गाजर, खीरा, टमाटर, शहद तथा दूध का प्रयोग कर सकते हैं।
महीने में 15 दिन के अंतराल पर आप केवल शुद्ध पानी अथवा नींबू पानी पर रहकर उपवास कर सकते हैं , उपवास करने के समय हमें कोल्ड- ड्रिंक्स, चाय एवं कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए, इसके स्थान पर फलों का जूस ले सकते हैं।
उपवास करने के शुरुआती दिनों में हमें अपने मुंह का बेस्वाद लगना एवं मुंह में से दुर्गंध आना पसीने का ज्यादा दुर्गंध युक्त होना नींद ना आना पेट में वायु भरा होना ऐसा लगने पर घबराना नहीं चाहिए निरंतर एवं धैर्य पूर्वक उपवास करते रहने से इन सारी समस्याओं का निराकरण स्वत: हो जाता है।
सावधानी-
उपवास को अपनी इच्छानुसार एवं किसी योग्य चिकित्सक के सलाह पर करें, तंदुरुस्त एवं निरोग व्यक्ति इसे शुरुआती दिनों में 1 दिन से ज्यादा न करें, जिन व्यक्तियों को भूख प्यास ज्यादा लगता हो, निम्न रक्तचाप (Low blood pressure) से ग्रस्त रोगी जिन्हें लगातार चक्कर आता हो, छोटे बालक, बालिकाओं, गर्भवती महिलाओं, तथा वृद्ध पुरुष एवं महिलाओं को काफी सोच-समझकर एवं अपनी शक्ति के अनुसार ही उपवास(fasting) करना चाहिए अन्यथा इसे नहीं करें।
(17)सुबह ब्रेकफास्ट(नाश्ता) में अंकुरित अनाज एवं फलियों का सेवन अवश्य करें-

सुबह सोकर उठते ही आजकल लोग चाय पीकर के अपने दिन की शुरुआत करते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खराब आदत है। सुबह नाश्ते में हमें कम कैलोरी युक्त हल्की एवं पौष्टिक चीजें खानी चाहिए जैसे अंकुरित अनाज का सेवन।
तो चलिए आज हम Natural Health Tips in Hindi इस लेख के द्वारा बताये गए tips में से हम सुबह नाश्ते में अंकुरित अनाज खाने के फायदे के बारे में जानते हैं-अंकुरित अनाज के अंतर्गत हम हरा अंकुरित मूंग, अंकुरित चना, अंकुरित गेहूं, बाजरा, मक्का, आदि का सेवन कर सकते हैं।
अंकुरित अनाज अथवा फलों का सेवन करने से हमारे शरीर में फाइबर की कमी पूरी होती है फाइबर से हमारा पेट भरा हुआ लगता है जिसके कारण हमें दोबारा जल्दी से भूख नहीं लगता है, इसमें कैलोरी ना के बराबर होती है ,यह protein, calcium, vitamin आदि पोषक तत्वों से भरपूर होता है।
यह खाद्य पदार्थ Dieting करने वालो के लिए रामबाण होता है इससे मोटापा कम करने वालों को काफी फायदा पहुंचता है हमारा वजन नियंत्रित रहता है। अंकुरित अनाज एवं फलों में कई सारे एंजाइम मौजूद होते हैं जिससे हमारा पाचन-तंत्र काफी मजबूत होकर सुचारु रूप से कार्य करने लगता है जिसके कारण हमें कब्ज जैसे कष्टदायक रोग से मुक्ति मिलती है।
इसके सेवन से हमारे शरीर में इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, मधुमेह के रोगियों को नाश्ते में इसका सेवन प्रतिदिन करना चाहिए, इससे उनका मधुमेह नियंत्रित होता है। अंकुरित अनाज जैसे अंकुरित गेहूं का सेवन कैंसर जैसे घातक बीमारी वाले रोगियों को कराने से उन्हें काफी लाभ मिलता है।
अंकुरित अनाज एवं फलों में प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा काफी उच्च होने से यह हमारी त्वचा के लिए हितकारी होता है, इससे त्वचा Skin की कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है, त्वचा कांतिवान होकर चमकने लगती है। इसके सेवन से हमारे शरीर में श्वेत रक्त कण WBC की पूर्ति होकर हमारे शरीर में कई तरह के रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है।
Conclusion (निष्कर्ष)-
मेरे दोस्तों आपने इन महत्वपूर्ण 17-Natural Health Tips in Hindi को पढ़ा आपने इसके लिए अपना अति महत्वपूर्ण समय मुझे दिया इसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया परंतु मुझे खुशी तब होगा जब आप इन सारी टिप्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करेंगे।
अपने जीवन में एक सही कदम उठाकर तथा प्रतिदिन की दिनचर्या में शामिल करके आप अपने अपने परिवार के सदस्यों को सुखमय एवं सेहतमंद शरीर दे सकते हैं जिससे आपकी आर्थिक एवं सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगा।
अस्वीकरण:-
इस लेख में दी गई जानकारी केवल आपके ज्ञान वृद्धि के लिए है। इसमें बताये गए बातों को अपनाने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य ले लें। इस लेख के द्वारा इसके किसी भी पाठक को होने वाले नुकसान की ज़िम्मेदारी healthy duniya 78 की नहीं होगी।