एक ऐसी सब्जी जिसका नाम सुनकर कई सारे लोग अपना नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं। जी हां आपने सही समझा मैं वही गुणों की खान करेला की ही बात कर रहा हूं, अपने कड़वे स्वाद के कारण कई बच्चे एवं बड़े भी इसे पसंद नहीं करते हैं। आज मैं अपने इस पोस्ट के माध्यम से आप लोगों को Karela Khane Ke Fayde एवं करेला में पाए जाने वाले उन सारे गुणों के बारे में तथा इसे खाने से होने वाले फायदे के बारे में आप सभी को अवगत कराऊंगा।
तो चलिए इसके गुण एवं अवगुण के बारे में जानें। करेला हमारे देश में पाया जाने वाला एक अत्यंत ही गुणकारी सब्जी है इसका स्वाद कड़वा होता है। करेला की उत्पत्ति सर्वप्रथम भारतवर्ष में ही हुई है।

Karela Khane Ke Fayde – गुणों की खान है करेला
करेला का वनस्पतिक नाम-
नाम– Momordica charantia L.
कुल– Cucurbitaceae
जाति– momordica
हमारे देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं और उन सभी भाषाओं में करेला को कई नामों से जाना जाता है तो चलिए आज आपको Karela Khane Ke Fayde नामक इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से भारत के कुछ प्रमुख भाषाओं में बोली जाने वाली करेला सब्जी के नामों के बारे में जानकारी देते हैं-
- हिंदी – करेला
- संस्कृत- कारवेल्ली, उग्रकांड, कारवेल्लक
- बांग्ला- करला, उच्छे, काल्ला
- गुजराती- करेलो, बेला, कड़वा
- पंजाबी- करेला
- मराठी- क्षुद्र-कारली, कारलें
- तमिल- पाकऱकाय्
- तेलुगू- काकर
- कन्नड़- हागलकायी
- मलयालम- पेरुं, पावल्
- अंग्रेजी- Bitter gourd
करेले का बाह्य-स्वरूप – Karela Khane Ke Fayde
करेला लता में लगने वाली सब्जी है इसकी लता पतली रोम युक्त कोमल होती है। इसके पत्ते कई भागों में विभक्त होते हैं जिनके किनारे गहरे कटे हुए होते हैं पत्ते की लंबाई एवं चौड़ाई 1 से 5 इंची के घर में गोल आकृति लिए हुए होती है। बेल पर नर एवं मादा फूल एक साथ आते हैं जो पीले रंग के होते हैं।
लता में लगने वाला फल जिसे हम करेला कहते हैं उसकी आकृति लंबी मध्य भाग में थोड़ी-थोड़ी तथा दोनों तरफ पतली निकली होती है, फल का पूरा भाग उबड़-खाबड़ त्रिकोण उभार युक्त होता है। फल की लंबाई देसी किस्म में 1 से 5 इंच तक तथा हाइब्रिड किस्में 8 से 9 इंच तक लंबी होती है।

कच्चा करेला हरे रंग का तथा इसके बीज सुनहरे रंग के होते हैं, पकने पर करेला पीला रंग का तथा अंदर इसके बीज एवं गुदा दोनों लाल रंग के हो जाते हैं। पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ यह एशिया महाद्वीप के कई देशों में बड़े रूप में इसकी खेती की जाती है इसके अलावा करेला का उत्पादन कैरीबियन क्षेत्रों में भी खाद्य सब्जी के रूप में किया जाता है।
करेला के किस्म – Types Of Bitter gourd
वैसे तो किस्म के आधार पर देखें तो दो प्रकार का करेला बाजार में मिलता है, पहला देशी किस्म तथा दूसरा जिसे हम संकर या हाईब्रिड किस्म कहते हैं। देसी किस्म में फसल का उत्पादन कम होता है इसमें उगने वाला करेला मध्यम आकार का अथवा छोटा होता है वही संकर किस्म में करेले का उत्पादन ज्यादा मात्रा में होता है तथा करेले का आकार काफी बड़ा होता है।
बाजार में करेले के कई उन्नत किस्म मिलते हैं, जिनमें – कोयंबटूर लौंग, अर्का हरित, पूसा विशेष, पूसा हाइब्रिड- 1, पूसा हाइब्रिड- 2, कल्याणपुर सोना, कल्याणपुर बारहमासी, हिसार सिलेक्शन, प्रिया को॰- 1, एस॰ डी॰ यू॰- 1, पंजाब करेला- 1 आदि प्रमुख है।
करेले की खेती- Cultivation of Bitter Gourd
इसकी खेती करने के लिए बलुई एवं दोमट मिट्टी काफी उपयुक्त होती है, यदि करेला अथवा कोई और जो भी सब्जी हो उसे आप यदि किसी नए खेत पर उगाने के लिए प्रयत्न कर रहे हैं तो सर्वप्रथम उस खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं।
मिट्टी में यदि खनिज लवण की मात्रा सही नहीं हो तो उस कमी को पूरा करने के बाद ही अपने खेत में बीजों की बुवाई का कार्य आरंभ करें।

करेला का ज्यादा मात्रा में उपज प्राप्त करने के लिए खेत का प्रबंधन अच्छी तरह से करना चाहिए, पूरे खेत में गहरी जुताई करके उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद 30 टन प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में डालना चाहिए, फिर खेत में पाटा चलाकर उसे समतल करना चाहिए ,खेत में गोबर की खाद डालने के लगभग 1 महीने बाद ही बीज की बुवाई का कार्य आरंभ करना चाहिए।
अपने खेत की जमीन में कहीं पर भी जल जमाव नहीं हो इसका ध्यान अवश्य रखना चाहिए, जिससे करेला का उत्पादन अच्छा एवं गुणवत्ता युक्त हो, यह लता में उगने वाला सब्जी है, बीज बोने के समय बीज से बीज की दूरी एवं नाली से नाली की दूरी निश्चित होनी चाहिए तथा पूरे खेत में जहां पर इसके बीज बोए जाएं वहां एक मजबूत मचान का होना आवश्यक है जिसके ऊपर लता चलती है, जिससे वह भूमि के संपर्क में नहीं होती है इसके कारण फसल सड़ने से बच जाता है और हमें अच्छा उत्पादन प्राप्त होता है।
करेला की खेती का समय- Time of Cultivation of Bitter Gourd
करेला की फसल को वर्ष में दो बार प्राप्त किया जाता है पहली फसल प्राप्त करने के लिए जनवरी से मार्च के महीनों में करेले के बीजों को बोना चाहिए यह करेला हमें गर्मियों के मौसम में प्राप्त होता है।
एक ही वर्ष में करेले का दूसरा उपज प्राप्त करने के लिए हमें इसके बीजों की बुवाई वर्षा काल में जून-जुलाई के महीनों में कर लेनी चाहिए यह फसल हमें सर्दियों का मौसम आने से पहले तक प्राप्त हो जाता है।
देश के पर्वतीय क्षेत्रों एवं पठारी भागों में कहीं-कहीं करेला की फसल को प्राप्त करने के लिए साल में मार्च से जून तक इसके बीजों की बुवाई की जाती है। करेला की फसल बीज बुवाई से लगभग 60 दिनों के अंदर करेला बाजार में ले जाने के लिए उपलब्ध हो जाता है।
करेला जूस के फायदे और नुकसान – Benefits and Side Effects of Bitter Gourd Juice

- करेला का ताजा जूस निकालकर उसे गर्म कर ले इस रस को हल्का ठंडा कर इसकी कुछ बूंदे कान में डालने से
कान का दर्द ठीक हो जाता है। - नित्य प्रतिदिन करेला का जूस अथवा करेला की सब्जी खाने से हमारे शरीर की
रोग-प्रतिरोधक क्षमता में काफी वृद्धि होती है जिससे हम कई बीमारियों से बचे रहते हैं। - पेट के कीड़ों को मारने के लिए करेले का जूस कुछ दिनों तक प्रतिदिन यदि पिया जाए तो पेट के कीड़े मर जाते हैं।
- गठिया की बीमारी में करेले का जूस गर्म कर दर्द वाले स्थान पर लगाने से दर्द में आराम मिलता है।
करेला का जूस पीने के फायदे तो अनेक है परंतु अत्यधिक उपयोग से कुछ नुकसान भी देखने को मिलते हैं करेला
के जूस का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट में दर्द, डायरिया एवं उल्टी हो सकती है।
यदि किसी व्यक्ति को ब्लड में शुगर की मात्रा कम हो अर्थात low sugar की बीमारी हो तो उसे नियमित रूप से
करेला नहीं खाना चाहिए क्योंकि करेला खाने से उसका शुगर लेवल सामान्य से बहुत कम हो जाएगा जिसके
भयंकर दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं।
करेला के औषधीय गुण- Medicinal properties of bitter gourd
करेला गुणों की खान है, यह कई बीमारियों की रामबाण औषधि के लिए जाना जाता है। अब चलिए हम Karela
Khane Ke Fayde एवं इसके औषधीय गुणों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं, प्रसिद्ध आयुर्वेद ग्रंथ
भाव प्रकाश निघंटु के अनुसार करेला वातकारक, शीतल, हल्का, कड़वा, भेदक, पित्तनाशक, कफनाशक,
ज्वरनाशक, कृमिनाशक, दस्तावर, तथा रक्तविकार, पांडुरोग एवं प्रमेह को समाप्त करता है।
करेला में ग्लूकोसाइड, केरोटीन, सेपोनिन तथा मार्मोडिसाइन नामक एलकेलॉइड (मूल तत्व) पाए जाते हैं।
करेले के बीजों में पर्याप्त मात्रा में Laxative oil भी पाया जाता है। इसके अतिरिक्त करेला में विटामिन A, विटामिन
C की मात्रा अधिक होती है, वहीं विटामिन B6 भी थोड़ी मात्रा में इसमें मौजूद होता है।
इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर की मात्रा भी अच्छी होती है इसके अलावा करेला में लौह तत्व, कैलशियम, पोटैशियम, सोडियम, मैग्नीशियम
भी पाया जाता है।
यदि हम करेले के औषधीय गुणों की बात करें तो सर्वप्रथम हमें करेला का फल ही याद आता है, परंतु यह सत्य नहीं है,
विभिन्न प्रकार के बीमारियों में करेला का सम्पूर्ण पंचांग (जड़, छाल, पत्ती, फूल एवं फल) सभी को हम औषधि के
रूप में ग्रहण करते हैं। तो चलिए हम इसके विविध औषधीय गुणों के बारे में जाने-
(1) नेत्र रोग में उपयोग- Use In Eye Disease
करेला के पत्तों का जूस निकालकर और एक काली मिर्च के एक चौथाई भाग को एक जंग लगे हुए लोहे के बर्तन
में घिसकर इसका लेप बनाकर इसे आंखों के बाहरी भागों में अंजन के रूप में लगाने से आंखों का जाला, फूला एवं
रतौंधी ठीक हो जाती है।
करना चाहिए।
(2) कान में दर्द की अचूक दवा- Perfect Medicine For Ear Pain
करेले के पत्तों का या करेले का ताजा जूस लेकर उसे गर्म कर ले इस जूस को हल्का ठंडा कर (सहने योग्य गर्म)
इसकी कुछ बूंदे दर्द करने वाले कान में डालने से दर्द कम होता है।
(3) शरीर में बढे़ हुए पित्त को कम करने में उपयोगी-
यदि शरीर में पित्त बढ़ गया हो तो करेले के पत्तों का जूस लगभग 10 ml की मात्रा में लेकर उसमें थोड़ा सेंधा नमक
मिलाकर पिलाने से उलटी होकर पित्त बाहर निकल जाता है जिससे हमें बढ़े हुए पित्त द्वारा होने वाली तकलीफ से
राहत मिलता है।
(4) गले की बीमारी में लाभदायक- Beneficial in Throat Disease
गले में सूजन होने पर एक सूखा करेला लेकर उसे थोड़े से Vinegar मिलाकर उसे खरल में पीसकर गर्म करके
सहने योग्य होने पर इस लेप को रोगी के गले में लगा दें तो इससे गले की सूजन ठीक हो जाती है।
(5) रोग प्रतिरोधक क्षमता(Immune System) को बढ़ाए-
करेला में काफी मात्रा में Vitamin एवं Minerals मौजूद रहते हैं। हमें प्रतिदिन जहां तक संभव हो करेले का जूस
पीना चाहिए, यदि यह संभव नहीं हो तो करेले की सब्जी अवश्य खानी चाहिए, इसको खाने से हमें कई गंभीर
बीमारियों से छुटकारा तो मिलता ही है अपितु यह हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में काफी वृद्धि करता है,
जिससे हम भविष्य में होने वाली कई बीमारियों से बचे रहते हैं।
(6) मुंह के छालों को ठीक करने की दवा- Medicine to Cure Mouth Ulcers
किसी को मुंह में छाले या घाव हो जाने पर करेले का जूस एक छोटा चम्मच की मात्रा में लेकर उसमें थोड़ी-सी
खड़िया (Chalk) मिट्टी मिलाकर उसका पेस्ट बनाकर घाव या छालों पर लगाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
अपने कड़वे स्वाद के कारण यह पेस्ट अच्छा नहीं लगता है अतः यदि किसी छोटे बच्चे को मुंह में छाले हो गए हो
तो इस पेस्ट में थोड़ी-सी पीसी हुई मिश्री (Rock candy) मिलाकर दे सकते हैं।
(7) गठिया (Gout) एवं अर्थराइटिस जैसे बीमारी में प्रभावशाली औषधि-
(8) पेट के कीड़ों को मारने के लिए उपयोगी-
प्रायः छोटे बच्चों में यह देखा जाता है कि खाना खाते समय उन्हें उल्टी जैसा लगता है, रात को सोते समय दांत
कटकटाने की आवाज आती है, मुंह से लार बहता रहता है, गुदाद्वार में प्रायः खुजली होती है, भूख ज्यादा लगती है
पर भोजन शरीर को पुष्ट नहीं करता उनका शरीर निस्तेज हो जाता है, शरीर थका हुआ-सा तथा इसके कारण बच्चे
काफी चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते हैं।
क्या आपने गौर किया इन सब का कारण क्या है? इन सभी लक्षणों का एक
ही कारण है बच्चों के पेट में कीड़ों का होना, यदि हम प्रतिदिन करेले का जूस कुछ दिनों तक बच्चों को पिलाएं तो
इस जूस के प्रभाव से उनके पेट में रहने वाले कीड़े मर जाते हैं,और बच्चे स्वस्थय एवं निरोग हो जाते हैं।
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(9) चेचक या खसरे से बचने के लिए उपयोगी-
चेचक या खसरा जैसे भयंकर बीमारियों से बचने के लिए हमें करेले के पत्तों का साग के रूप में सेवन कई दिनों
तक करना चाहिए, इससे चेचक या खसरा हमारे पास नहीं फटकते हैं।
(10) पथरी को ठीक करने की कारगर दवा-
पथ्य–
जिन व्यक्तियों को पथरी की शिकायत हो उन्हें ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए। अथवा जलयुक्त खाद्य पदार्थों का
अपथ्य–
पथरी की शिकायत वाले लोगों को टमाटर खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि टमाटर में Oxalic acid नामक
(11) Diabetes के रोगियों को की रामबाण दवा-
Diabetes(शुगर) के रोगियों को नित्य-प्रतिदिन करेला का जूस सुबह खाली पेट पीने से ब्लड में शुगर की मात्रा कम
हो जाती है। इसके अलावा डायबिटीज के रोगी करेला को काटकर उसके टुकड़ों को छांव में सुखाकर रख लें फिर
खरल में अथवा सिलबट्टे पर पीसकर इसका चूर्ण बनाकर 2.5 ग्राम से 3 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ ले। इस चूर्ण
का सेवन प्रतिदिन करने से पेशाब में शुगर आनी बंद हो जाती है।
(12) Skin (त्वचा) के अनेक बीमारियों में लाभदायक-
शरीर पर कहीं भी फोड़े-फुंसी की खुजली, दाद, खाज होने पर करेले को पीसकर इसे गर्म करके प्रभावित स्थानों
पर लगाने से बीमारी ठीक हो जाती है। उपरोक्त बीमारियां हमारे शरीर में रक्त के दूषित होने से होता है अतः हमें
बाहरी प्रयोग के साथ ही ताजा करेला के जूस मैं थोड़ा नींबू का जूस मिलाकर पीना चाहिए इससे हमारे शरीर में
रक्त शुद्ध हो जाता है जिसके कारण हमारी त्वचा स्वस्थ एवं कान्तिवान हो जाती है।
(13) दाह(त्वचा में जलन) में अत्यंत लाभकारी-
हमारी त्वचा में कहीं पर भी यदि दाह(जलन) होती है तो उस स्थान पर करेला के पत्तों को पीसकर उसका लेप
लगाने से दाह(जलन) ठीक हो जाता है। ठीक यही प्रयोग पैर के तलवों में जलन(दाह) होने पर भी करना चाहिए।
(14) Spleen(प्लीहा) वृद्धि की बीमारी की दवा-
किसी व्यक्ति का Spleen(प्लीहा) बढ़ गया है तो उसे पेट में एवं बाएं ऊपरी कंधे तथा फेफड़े के नीचले भागों में तेज
दर्द महसूस होता है इसे ठीक करने के लिए करेला के जूस में थोड़ी सी पिसी हुई राई तथा सेंधा नमक मिलाकर
इसका सेवन करने से प्लीहा का बढ़ना रुक जाता है एवं उसका आकार पहले जैसा हो जाता है और रोगी स्वस्थय हो
जाता है।
(15) पीलिया रोग में लाभदायक-
पीलिया (Jaundice) रोग होने पर करेले के ताजे पत्तों का जूस निकालकर 15ml की मात्रा में लेकर उसमें हरड़
को पीसकर उस जूस को पिलाने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। यह प्रयोग पीलिया के लक्षणों के ठीक हो जाने
तक करते रहें, जब तक ब्लड में पित्त (bile) की बढ़ी हुई मात्रा सामान्य ना हो जाए।
(16) बच्चों को होने वाले निमोनिया (Pneumonia) बुखार की प्रभावशाली दवा-
प्रायः छोटे बच्चों के फेफड़ों में कफ जमा हो जाने के कारण उन्हें निमोनिया बुखार हो जाता है जो कि बच्चों के लिए
काफी कष्टदायक होता है। तथा जल्दी चिकित्सा नहीं कराने पर यह प्राणघातक भी हो सकता है, अतः इसकी
चिकित्सा की अनदेखी कभी नहीं करनी चाहिए।
भारतीय आयुर्वेद शास्त्र में निमोनिया की चिकित्सा उपलब्ध है, जो काफी सरल एवं असरदार है,
करेला के पत्तों का जूस लगभग 10 ml की मात्रा में लेकर उसे थोड़ा गर्म कर लें फिर हल्का सहने योग्य ठंडा करके
उसमें थोड़ी-सी असली केशर मिलाकर बच्चे को पिला दें। इस औषधि को दिन में
तीन बार सुबह,दोपहर एवं शाम को पिलाएं, इससे निमोनिया बुखार में आराम मिलता है।
(17) अम्लपित्त (Acidity) रोग में लाभदायक-
यदि किसी रोगी को अत्यधिक अम्लपित्त(Acidity) होने के कारण भोजन करने के तुरंत बाद उल्टी (Vomiting) हो
जाता हो तो करेले के पत्तों या करेले के फूलों को शुद्ध देसी घी में भूनकर एवं उसमें थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर
खिलाने से अम्लपित्त रोग दूर हो जाता है।
(18) बवासीर से छुटकारा पाने का घरेलू उपचार-
- खूनी बवासीर के बीमारी से छुटकारा पाने के लिए करेला के पत्तों का ताजा जूस पियें करेला का ताजा निकाला
हुआ जूस लेकर उसमें एक चम्मच पिसी हुई शक्कर मिलाकर नियमित रूप से दिन में दो बार लेने से खूनी बवासीर
ठीक होता है। - इसके अलावे करेले की लता या बेल के छोटे-छोटे टुकड़े करके पानी के साथ उबालकर इसके क्वाथ
में थोड़ी सी शक्कर मिलाकर लगभग 20 ml की मात्रा में नियमित रूप से लेने पर खूनी बवासीर ठीक हो जाता है। - बादी बवासीर में जिसमें खून नहीं निकलता है इसमें गुदा द्वार के बाहर एवं अंदर में अंगूर के गुच्छे के समान मस्से
निकलते हैं जो काफी पीड़ादायक होता है इसे ठीक करने के लिए करेला की जड़ को घिसकर इसे रोगी ऊकडूं
बैठकर अपनी अंगुली से इस लेप को गुदाद्वार में स्थित मस्सों पर लगाने से आराम मिलता है।
(19) महिलाओं के मासिक धर्म से संबंधित घरेलू उपाय-
यदि किसी महिला को अनियमित मासिक धर्म हो रहा हो या मासिक धर्म में दूषित रक्त कम मात्रा में निकलने पर,
करेले के ताजे पत्तों के जूस में पिसी हुई कालीमिर्च, सुखा अदरक(सोंठ) का चूर्ण एवं पीपल का चूर्ण मिलाकर लेप
बना लें।
अब इस लेप को रोगी महिला अपने पेडू (पेट के निचले भाग) पर लगावें, इस लेप को लगाने से मासिक धर्म
संबंधित समस्याएं ठीक हो जाती है। रोगी महिला यदि उपरोक्त वस्तुओं का संग्रह कर पाने में असमर्थ हो तथा
समयाभाव भी हो तो वे केवल करेले का जूस का सेवन कर सकती हैं जिससे उनको इस रोग से राहत मिलेगा।
(20) स्त्रियों की योनी का अंत: प्रविष्ट(अंदर की ओर) होने पर घरेलु उपचार-
यदि किसी महिला की योनि अपने अंदर की और धस गई हो अर्थात अंदर की ओर समा गई हो तो इसे सामान्य
अवस्था में लाने के लिए करेला की जड़ को उखाड़ ले एवं उसे थोड़े से पानी के साथ सिलबट्टे पर पीसकर इसका
लेप बनाएं।
अब इस लेप को अपने योनि के बाहरी भागों में लगा ले, इस लेप को कुछ दिनों तक नियमित रूप से लगाने
पर योनि पहले की तरह बाहर की ओर निकल कर सामान्य अवस्था में आ जाती है।
(21) स्तनों में दूध को बढ़ाने के लिए उपयोगी-
कई बार नवजात बच्चों को जन्म देने वाली माताओं के स्तनों से दूध कम आता है, इसे पुनः बढ़ाने के लिए करेले के
ताजे पत्तों को उबालकर 20ml की मात्रा में इसका क्वाथ (काढ़ा) कुछ दिनों तक पिलाने से उनके स्तनों में दूध की
वृद्धि हो जाती है।
(22) छोटे बच्चों को होने वाली बार-बार उल्टी का घरेलू उपचार-
मेरी किसी शिशु को कुछ भी खाने से अथवा पानी पीने से भी बार बार उल्टी (Vomiting) हो जाती हो तो, पके हुए
करेले के दो या तीन बीज लें, इसमें समान मात्रा में कालीमिर्च लेकर मिक्सी अथवा सिलबट्टे पर थोड़े से पानी के साथ
पीसकर उसे छान लें अब इस औषधि को एक या आधा छोटा चम्मच की मात्रा में बच्चे को पिलाएं, इसे पिलाने से
उल्टी (Vomiting) होना ठीक हो जाएगा।
(23) पित्त के कारण होने वाली सिर दर्द के लिए उपयोगी-
शरीर में यदि पित्त के बढ़ जाने से सिर में काफी दर्द हो रहा हो, तो करेले के ताजे पत्तों का जूस 10ml की मात्रा में
लेकर साथ में पित्तपापड़े का जूस एवं उसमें थोड़ा गाय का देसी घी मिलाकर लेप बना लें, इस लेप को अपने सिर
पर लगाने से पित्त के कारण होने वाली सिर दर्द में तुरंत ही आराम मिलता है।
(24) Ulceritis (व्रणशोथ) में फायदा करें-
यदि किसी को व्रणशोथ (ulceritis) हो गया हो तो करेले के ताजे फूलों को पीसकर उसमें थोड़ा सेंधा नमक मिला
लें, इस लेप को फोड़े के ऊपर में लगा कर उसे कपड़े की सहायता से बांध दे, इससे रोगी को काफी फायदा होगा।
(25) पेशाब में खून आने पर उपचार-
यदि किसी भी कारणवश अचानक पेशाब लालिमायुक्त हो रहा हो अर्थात् उसमें खून की मात्रा मौजूद हो तो करेले
का ताजा जूस लेकर दोपहर के समय जिस समय धूप अधिक तेज हो इसका सेवन करें, लगभग 3 से 4 दिन इसका
सेवन करने से पेशाब में खून आना बंद होकर रोगी को आराम मिलेगा।
(26) पेशाब रुक जाने पर उसे ठीक करने का कारगर उपाय-
यदि किसी को कोई भी कारण से पेशाब होना रुक जाए या बंद हो जाए तो करेला के ताजे पत्तों के जूस में
थोड़ी-सी असली हींग मिलाकर पिलाएं, इसको पीने से तुरंत ही पेशाब होना शुरू हो जाएगा।
(27) Malaria (मलेरिया) बुखार का उपचार-
मलेरिया (malaria) बुखार को हमारे आयुर्वेद शास्त्र में शीतज्वर के नाम से जाना जाता है। यह बुखार मादा
एनाफिलीज (female anopheles) मच्छर (mosquito) के काटने से होता है।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में मलेरिया की दवा कुनैन की छाल से तैयार की जाती है जिसे हम
प्रायः Chloroquine के नाम से जानते हैं। हमारे भारतीय आयुर्वेद में भी मलेरिया को जड़ से
मिटाने के लिए कई प्रभावशाली औषधियां मौजूद है।
आज हम इस ब्लॉग पोस्ट Karela Khane Ke Fayde इस लेख के माध्यम से करेला के गुण
एवं अवगुण तथा उसका मलेरिया को ठीक करने के लिए औषधि के रूप में घरेलू उपयोग के बारे में जानेंगे-
- मलेरिया बुखार होने पर करेले के तीन से चार ताजे पत्ते लेकर साथ में समान मात्रा में काली मिर्च लेकर सिलबट्टे
अथवा मिक्सी में पीस लें, इसका नियमित रूप से कुछ दिनों तक सेवन करने से बुखार ठीक हो जाता है। - करेले के ताजे पत्तों का 15ml जूस लेकर उसमें थोड़ा सा जीरा पीसकर मिला दें। अब इस जूस को बुखार आने
के समय से ठीक पहले दिन में तीन बार सुबह, दोपहर एवं शाम को पिलाने से बुखार धीरे-धीरे ठीक हो जाता है। - कई पुराने आयुर्वेदाचार्यों के कथन अनुसार करेले के जड़ को काटकर यदि रविवार को मलेरिया के रोगी के
कमर में बांधा जाए तो धीरे-धीरे बुखार उतर जाता है।
(3rd no का प्रयोग केवल जानकारी हेतु दिया गया है इसे प्रयोग में लाने से पहले सोच विचार कर ले या किसी योग्य
आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।)
(28) पुरुषों में स्तंभन शक्ति की क्षमता में वृद्धि के लिए उपयोगी-
पुरुषों में कई बार कुछ निजी कारणवश उनके अंतरंग पलों में स्तंभन शक्ति (Erectile Power) कम हो जाती है,
जिसके कारण वे अपने पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पाते हैं। इसे ठीक करने के लिए आयुर्वेद में कई उपचार मौजूद है।
पहली विधि-
करेले का जूस तथा करेले के पत्तों का जूस दोनों को मिलाकर आग पर उबालें तब तक चलाते रहें जब
तक कि वह सुख कर गोली बनाने के लिए पर्याप्त ना हो जाए, फिर इसकी 2.5 ग्राम से 3 ग्राम की मात्रा में गोलियां
बना लें।
पहले थोड़ा गाय का दूध पीकर के ऊपर से एक गोली खा ले फिर कुछ देर बाद एक छोटा चम्मच शहद चाट
ले, इस औषधि का सेवन करने से स्तंभन शक्ति में काफी वृद्धि होती है।
दूसरी विधि-
करेले के पत्तों का लगभग 100ml जूस लेकर उसे रात में छत के ऊपर शीत(ओस) में रख दें, सुबह
कुलजन का पाउडर (चूर्ण) लगभग 25 ग्राम की मात्रा में लेकर जूस में मिलाकर छाया में सुखा लें, सूख जाने पर इसे
सुरक्षित रख ले।
अंतरंग मिलन के समय से लगभग 1 घंटे पूर्व यह दवा 3 ग्राम की मात्रा में लेकर भैंस के 250ml
दूध के साथ सेवन करें। इसके सेवन से कामोत्तेजना एवं स्तंभन शक्ति में अतिवृद्धि होती है।
निष्कर्ष (Conclusion)-
दोस्तों आपने हमारा लेख Karela Khane Ke Fayde को पढ़ा इसके लिए आपको धन्यवाद इस लेख में मैंने करेला
को खाने से होने वाले सभी फायदों का वर्णन करने का कोशिश किया है, साथ ही इसको खाने से होने वाले नुकसान
को भी बताया है।
इस लेख में कुछ बीमारियों को ठीक करने का नुस्खा भी बताया गया है, जो आपको स्वस्थ रहने में
सहायता प्रदान करेगा। अगर इस लेख में कोई कमी रह गई हो या कोई त्रुटि हो तो कृपया कमैंट्स के द्वारा हमें
जानकारी दें हम आपके द्वारा बताए गए त्रुटि या कमी को दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे।
इस लेख को लिखने का मेरा उद्देश्य केवल आपको लाभान्वित करना है जो शारीरिक स्वस्थ या ज्ञान
वृद्धि दोनों ही क्षेत्रों में कोई भी हो सकता है और अंत में मैं यही कहूंगा कि इस लेख में मेरे लिखे गए
किसी भी नुस्खे को उपयोग में लाने से पहले किसी योग्यआयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
इस लेख में दी गई जानकारी से यदि किसी पाठक को लाभ हुआ हो तो
हमें जरूर बताएं, धन्यवाद।
अस्वीकरण:
सलाह का दावा नहीं करता है। किसी भी नुस्खे को आज़माने से पहले हमेशा किसी रोग विशेषज्ञ अथवा किसी आयुर्वेद
चिकित्सक से परामर्श करें। इससे कोई भी पाठक को किसी भी प्रकार का नुकसान होने पर healthy duniya 78
जिम्मेदार नहीं होगा।
Karela Khane Ke Fayde [FAQ] –
(1) करेले में कौन सा विटामिन पाया जाता है?
उत्तर- करेला में विटामिन A एवं विटामिन C प्रचुर मात्रा में पाया जाता है वहीं इसमें विटामिन B6 भी कम मात्रा में
मौजूद रहता है। इसके अलावा करेला में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, सोडियम,
मैग्निशियम, एवं फाइबर, भी पाया जाता है।
(2) रोजाना कितना करेला खाना चाहिए?
उत्तर-वैसे तो करेला हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है 1 दिन भर में हम करेला 50 से 100 ग्राम तक
खा सकते हैं। लेकिन प्रतिदिन रोज करेला खाने से हमें बचना चाहिए क्योंकि कहा ही गया है ‘अति सर्वत्र वर्जयेत् ‘
अर्थात् किसी भी चीज की अति करना हमेशा ही नुकसानदेह होता है।
(3) करेला कब नहीं खाना चाहिए?
उत्तर- यदि किसी को यकृत (Liver) की बीमारी या liver से संबंधित कोई समस्या हो तो उसे करेला नहीं खाना
चाहिए करेला खाने से उनकी समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है।
(4) रोज करेला खाने से क्या होता है?
उत्तर- रोज करेला खाने से वह हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता हमें सप्ताह में 2 या 3 दिन के अंतराल पर
करेले का सेवन करना चाहिए।
रोज प्रतिदिन करेला खाने से लो शुगर वालों को ब्लड में शुगर की मात्रा खतरनाक
स्तर तक कम हो सकता है, जिसके कारण उन्हें हीमोलिटिक एनीमिया होने का खतरा हो सकता है। इसके
अतिरिक्त फैटी लीवर के रोगियों को भी करेले का सेवन रोज नहीं करना चाहिए।
(5) करेला खाने से क्या लाभ होता है?
उत्तर- करेला एक अत्यंत ही गुणकारी एवं पौष्टिक सब्जियां इसे खाने से हमें कई प्रकार के बीमारियों से छुटकारा
मिलता है तथा हम भविष्य में होने वाली अनेक प्रकार की बीमारियों से बचे रहते हैं जैसे-
- प्रत्येक दिन नियमित रूप से करेले का जूस पीने से ब्लड में बढ़ा हुआ शुगर लेवल कम हो जाता है,जिसके कारण धीरे-धीरे
मधुमेह (Diabetes) ठीक होने लगता है। - Kidney अथवा यूरिनरी ब्लैडर में होने वाली पथरी में करेला का सेवन करने से लाभ होता है।
- गठिया(Gout) एवं अर्थराइटिस की बीमारी में करेले का सेवन फायदेमंद होता है। इसका जूस निकालकर इसे गर्म
करके दर्द वाले स्थान पर लगाने से दर्द कम हो जाता है। - करेले का सेवन करने से कुछ ही दिनों में पेट में रहने वाले हानिकारक कीड़े मर जाते हैं, जिससे हमारा
शरीर स्वस्थ हो जाता है। - कान के दर्द में भी यह फायदा पहुंचाता है, इसके ताजे जूस को हल्का गर्म कर इसकी कुछ बूंदें दर्द करने वाले कान में
डालने से दर्द कम हो जाता है। - करेले का नियमित रूप से सेवन करने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (immune system) में वृद्धि होती है।
त्वचा (skin) की कई प्रकार की समस्याओं में करेला का सेवन अत्यंत लाभदायक होता है। - Spleen(प्लीहा) वृद्धि की बीमारी में करेला का सेवन करने से Spleen (प्लीहा) का बढ़ना रुक कर इसका आकार पहले
जैसा सामान्य हो जाता है। - खूनी या वादी बवासीर दोनों में से कोई भी हो तो करेला का सेवन करने से लाभ मिलता है।
इसके अलावा भी करेला का सेवन करने से और भी अनेक प्रकार के फायदे हमे प्राप्त होते हैं।
उत्तर– यकृत (जिगर) से संबंधित रोगियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि करेले का सेवन करने से उनकी
उत्तर– करेला रात को खाने से ठीक से पच नहीं पाता है। क्योंकि करेला को पचाने के लिए हमारे शरीर को ज्यादा
उत्तर- करेले की तासीर ठंडी होती है।
उत्तर– हां, करेला में ग्लूकोसाइड, कैरोटीन, सपोनिन, तथा मार्मोडिसाइन, नामक मूल तत्व(एलकलॉइड) पाए जाते हैं।
उत्तर– करेला खाने के साथ में मूली तथा भिंडी की सब्जी नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इन्हें करेला के साथ खाने से पेट